तीन तलाक पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में क्या-क्या हुआ?
सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की बेंच ने कहा, इस वक्त कोर्ट के पास समय की कमी है। इसलिए फिलहाल तीन तलाक पर ही सुनवाई होगी। बहुविवाह और हलाला पर बाद में सुनवाई होगी।
सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की बेंच ने कहा, इस वक्त कोर्ट के पास समय की कमी है। इसलिए फिलहाल तीन तलाक पर ही सुनवाई होगी। बहुविवाह और हलाला पर बाद में सुनवाई होगी।
तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार का दिन नई दलीलों का दिन था। सरकार का पक्ष सीधे अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने रखा ।
मुकुल रोहतगी ने कहा, तीन तलाक के साथ साथ निकाह हलाला और पॉलीगैमी पर भी सुनवाई जरूरी है। हलाला और बहुविवाह का मामला सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच के पास है। इस मामले में भी पांच जजों की संविधानिक बेंच को अपना फैसला सुनाना चाहिए। उन्होंने एक और दमदार बात कही। जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान जैसे कट्टर देश इस प्रथा को खत्म कर चुके हैं तो भारत जैसे सेकुलर देश पीछे क्यों हैं? अगर कोर्ट तीन तलाक को गैरकानूनी बता दे तो सरकार मुसलमानों की शादी और तलाक के लिए भी कानून लाएगी। हिंदू मैरिज एक्ट की तरह मुस्लिम मैरिज एक्ट बनाया जा सकता है।
इसके जवाब में सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की बेंच ने कहा, इस वक्त कोर्ट के पास समय की कमी है। इसलिए फिलहाल तीन तलाक पर ही सुनवाई होगी। बहुविवाह और हलाला पर बाद में सुनवाई होगी। बहुविवाह का मतलब है एक मुस्लिम मर्द को चार बीवी रखने की प्रथा और हलाला यानि तीन तलाक के बाद अगर पति-पत्नी वापस लौटना चाहें तो भी साथ नहीं आ सकते। पत्नी को किसी और से शादी करनी होगी। किसी और मर्द से संबंध बनाने होंगे इसके बाद ही वो फिर निकाह कर सकती है।
अब आपको उस संविधानिक बेंच के बारे में बताते हैं जो इस पूरे केस को सुन रही है। इस बेंच में चीफ जस्टिस जेएस खेहर, जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस अब्दुल नजीर शामिल हैं। इन पांच जजों की बेंच की खासियत यह है कि इसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और पारसी धर्म को मानने वाले जज शामिल हैं। तीन तलाक के इस जटिल इस मसले को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने गर्मी की छुटि्टयों में रोज सुनवाई करने का फैसला किया है। इसलिए फैसला बहुत जल्द आने की उम्मीद है।



